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प्रवासी भारतीय और प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा डायस्पोरा है। प्रवासी भारतीय समुदाय अनुमानतः 2.5 करोड़ से अधिक है। जो विश्व के हर बड़े क्षेत्र में फैले हुए हैं। फिर भी किसी एक महान भारतीय डास्पोरा की बात नहीं की जा सकती। प्रवासी भारतीय समुदाय सैंकड़ों वर्षों में हुए उत्प्रवास का परिणाम है और इसके पीछे विभिन्न कारण रहे हैं जैसे वाणिज्यवाद, उपनिवेशवाद और वैश्वीकरण। इसके शुरू के अनुभवों में कोशिशों, दुःख-तकलीफों और दृढ़ निश्चय तथा कड़ी मेहनत के फलस्वरूप सफलता का आख्यान है। 20वीं शताब्दी के पिछले तीन दशकों के उत्प्रवास का स्वरूप बदलने लगा है और "नया डायस्पोरा" उभरा है जिसमें उच्च कौशल प्राप्त व्यावसायिक पश्चिमी देशों की ओर तथा अकुशल/अर्धकुशल कामगार खाड़ी, पश्चिम और दक्षिण पूर्व एशिया की और ठेके पर काम करने जा रहे हैं।

इस प्रकार, प्रवासी भारतीय समुदाय एक विविध विजातीय और मिलनसार वैश्विक समुदाय है जो विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करता है। एक आम सूत्र जो इन्हें आपस में बांधे हुए है, वह है भारत और इसके आंतरिक मूल्यों का विचार। प्रवासी भारतीयों में भारतीय मूल के लोग और अप्रवासी भारतीय शामिल हैं और ये विश्व में सबसे शिक्षित और सफल समुदायों में आते हैं। विश्व के हर कोने में, प्रवासी भारतीय समुदाय को इसकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, हस्तक्षेप न करने और स्थानीय समुदाय के साथ सफलतापूर्वक तालमेल बनाये रखने के कारण जाना जाता है। प्रवासी भारतीयों ने अपने आवास के देश की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है और स्वयं में ज्ञान और नवीनता के अनेक उपायों का समावेश किया है।

मंत्रालय और उसके जनादेश

प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय (एमओआईए) सभी अनिवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) और भारत के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) से संबंधित मामलों के लिए नोडल मंत्रालय है। इसका उद्देश्य भारत और विदेशी भारतीयों के बीच पारस्परिक रूप से लाभप्रद और प्रतीकात्मक संबंध बनाए रखना और बढ़ावा देना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एमओआईए चार प्रमुख सिद्धांतों द्वारा निर्देशित है:

  • विदेशों में भारतीय समुदाय के विभिन्न अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए समाधान प्रस्ताव
  • प्रवासी भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को एक सामरिक आयाम
  • ज्ञान और संसाधन के मामले में प्रवासी निवेश समुदाय से संपर्क
  • राज्य में सभी प्रवासियों की पहल के लिए आमंत्रण

प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय ने प्रवासी भारतीय समुदाय की बेहतरी के लिए कार्यक्रमों/पहलों की श्रृंखला पेश की है।

प्रवासी भारतीय दिवस

9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मान्यता दी गई है क्योंकि इसी दिन 1915 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और अंततः दुनिया भर में प्रवासी भारतीयों और औपनिवेशिक शासन के तहत लोगों के लिए और भारत के सफल स्वतंत्रता संघर्ष के लिए प्रेरणा बने। यह दिन हर साल प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) सम्मेलन के रूप में मनाया जाता है। प्रवासी भारतीय दिवस प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है।

छठवें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा संयुक्त रूप से 7-9 जनवरी, 2009 को चेन्नई में किया गया। चार विषयों - 'उभरती शक्ति भारत- प्रवासी फैक्टर', 'वर्तमान आर्थिक संकट का प्रभाव - प्रवासियों की चिंता', 'राज्यों के साथ प्रवासियों का संवाद' तथा 'प्रवासी भारतीय- भाषा और संस्कृत का संरक्षण' पर विस्तृत चर्चा इस सम्मेलन में की गई। वहीं 'पुल निर्माण- व्यापार और निवेश', 'प्रवासी मानव विज्ञान', 'शिक्षा और प्रवासी ज्ञान संजाल', 'मीडिया और मनोरंजन', 'प्रवासी महिलाओं से बेहतर संवाद' और 'सबके लिए स्वास्थ्य- प्रवासियों की भूमिका' जैसे छः समकालीन विषयों पर भी चर्चा सम्मेलन के दौरान हुई। खाड़ी, एशिया-प्रशांत, अफ्रीका, अमेरिका, कनाडा, कैरेबियाई और यूरोप पर केंद्रित क्षेत्रीय कार्य सत्रों का भी आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में दुनिया के 54 देशों से लगभग 1800 प्रतिनिधियों ने शिरकत की।

सम्मेलन का उद्घाटन भारत के माननीय प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने किया। भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवीसिंह पाटील ने 9 जनवरी को समापन सत्र में भारतीय मूल के 13 व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किए। प्रवासी भारतीय सम्मान पाने वालों का चयन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति की अध्यक्षता में गठित ज्यूरी सह अवॉर्ड समिति द्वारा किया गया।

प्रवासी भारतीय दिवस 2009 में सूरीनाम के उपराष्ट्रपति रामदीन सरदजोई मुख्य अतिथि थे।

प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार (पीबीएसए)

प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार, प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का हिस्सा है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा 2003 से दिया जा रहा है। प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार, प्रवासी भारतीयों को दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है।

प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार की संशोधित मार्गदर्शिकाओं के अनुसार यह पुरस्कार किसी अप्रवासी भारतीय, भारतीय मूल के व्यक्ति अथवा संगठन अथवा संस्थान, जिसे अप्रवासी भारतीयों अथवा भारतीय मूल के लोगों द्वारा स्थापित किया गया हो, और जिसने निम्नलिखित कार्य किए हों:

  • भारत की विदेशों में बेहतर सूझबूझ के प्रति योगदान और भारत के उद्देश्यों और चिंताओं के प्रति वास्तिवक रूप में सहायता
  • डायस्पोरा के कल्याण के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान
  • लोकोपकार और धर्मार्थ कार्य तथा भारत और विदेशों में सामाजिक और मानवीय कार्यों में उल्लेखनीय योगदान
  • आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में भारत और इसके डायस्पोरा के बीच संबंधों को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय योगदान
  • किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य में अपनी अलग पहचान, जिससे उनके निवास के देश मे भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी हो

अथवा

अपने कौशल से अपनी पहचान, जिससे उस देश में भारत का सम्मान बढ़ा हो (गैर व्यावसायिक कामगारों के लिए)।

पुरस्कार के लिए नामांकन विदेशों में भारतीय राजयनिकों मिशनों के प्रमुखों, प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष, प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय द्वारा यथानिर्णित राष्ट्रव्यापी स्तर की प्रमुख एसोसिएशन और प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं द्वारा किए जा सकते हैं।

भारतीय मूल के 81 व्यक्तिओं और एक प्रवासीय भारतीय संगठन राष्ट्रीय भारतीय संस्कृति संघ, त्रिनिडाड एवं टोबेगो को इस सम्मान से सुशोभित किया गया है।

मिनी-पीबीडी

'पीबीडी सिंगापुर' नाम के एक मिनी पीबीडी का आयोजन सिंगापुर भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसआईसीसीआई) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की भागीदारी और सिंगापुर सरकार की सहायता से 9-11 अक्टूबर, 2008 के दौरान सिंगापुर में किया गया। समारोह का शीर्षक "पीबीडी सिंगापुर: गतिशील भारतीय डायस्पोरा की ओर" रखा गया था। सिंगापुर के राष्ट्रपति श्री एसआर नाथन, प्रधानमंत्री श्री ली हसिएन लूंग, उपप्रधानमंत्री प्रोफेसर एस. जयकुमार, वरिष्ठ मंत्री श्री गोचोक टोंग, मंत्री मेन्टर, श्री ली कुवान येव और वरिष्ठ राज्यमंत्री श्री एस ईश्वरन ने समारोह में हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री श्री कपिल सिब्बल और श्री वयालार रवि के अलावा मारीशस के प्रधानमंत्री और मलेशिया के वरिष्ठ मंत्रियों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

"पीबीडी यूरोप" नाम के एक अन्य मिनी पीबीडी का आयोजन 19 सितंबर, 2009 को नीदरलैंड में किया जा रहा है।

भारत के प्रवासी नागरिकों के लिए बाहरी नागरिकता (ओसीआई) योजना

प्रवासी भारतीयों की दोहरी नागरिकता की लगातार मांग खासकर उत्तर अमेरिका और अन्य विकसित देशों के प्रवासी भारतीयों की मांग को देखते हुए तथा सरकार की प्रवासी भारतीयों की आशाओं ओर अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को निभाते हुए अगस्त, 2005 में प्रवासी भारतीयों के लिए "दोहरी नागरिकता" योजना के नागरिकता आधिनियम, 1995 में संशोधन के बाद लागू किया गया। इस योजना का शुभारंभ हैदराबाद में वर्ष 2006 में आयोजित प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान किया गया था। इस योजना के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश अथवा केंद्र सरकार द्वारा सरकारी राजपत्र में निर्दिष्ट किए जाने वाले देश को छोड़कर सभी देशों के भारतीय मूल के सभी व्यक्तियों, जो कि भारत के नागरिक थे अथवा 26 जनवरी, 1950 अथवा उसके बाद भारत के नागरिक बनने के लिए पात्र थे, को प्रवासी भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकरण कराने की सुविधा देने की व्यवस्था है।

भारत के पंजीकृत प्रवासी नागरिकों को बहु-प्रवेश, बहुआयामी भारत भ्रमण के लिए आजीवन वीजा की पात्रता है। भारत के पंजीकृत प्रवासी नागरिक को क्षेत्रीय विदेश पंजीकरण अधिकारी अथवा विदेश पंजीकरण अधिकारी के यहां किसी भी अवधि तक भारत में रहने के लिए पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। उसे अप्रवासी भारतीय के समान आर्थिक, वित्तीय तथा शैक्षणिक क्षेत्रों में सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मंत्रालय पंजीकृत प्रवासी भारतीयों के लाभ के लिए अन्य कार्य भी कर रहा है। मंत्रालय ने अधिसूचित किया है कि उन्हें भारत के अंदर घरेलू क्षेत्र में हवाई टिकट शुल्क में, नेशनल पार्क तथा अभ्यारण्य देखने के शुल्क में तथा देश में भारतीय बच्चा गोद लेने के मामले में अप्रवासी भारतीयों के समान माना जाएगा। जुलाई 2008 तक भारतीय मूल के 2,81,000 लोगों ने पंजीकरण करवाया है।

5 जनवरी, 2009 से निम्न मामलों के संबंध में प्रवासी भारतीय नागरिकता को अप्रवासी भारतीयों के समान माना जाएगा—

  • भारत में तीन राष्ट्रीय स्मारकों, ऐतिहासिक स्थलों तथा संग्रहालयों के लिए प्रवेश शुल्क
  • संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भारत में निम्न कार्य करने पर-
    • डॉक्टर, दंत-चिकित्सक, नर्स तथा फार्मासिस्ट
    • वकील
    • वास्तुविद
    • चार्टर एकाउंटेंट
  • संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उन्हें दाखिले के लिए आल इंडिया प्री-मेडिकल तथा ऐसी ही परीक्षाओं में बैठने की अनुमति होगी।

अधिसूचना के उचित तथा सुचारू कार्यान्वयन के लिए संबद्ध मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों को आवश्यक प्रावधान करने के लिए कहा गया है।

भारतीय प्रवासी नागरिकता को दोहरी नागरिकता नहीं समझना चाहिए। इससे उस व्यक्ति की राजनैतिक अधिकार नहीं मिलते। भारतीय प्रवासी नागरिकता योजना की प्रक्रिया तथा विस्तृत जानकारी मंत्रालय की वेबसाइट www.mha.nic.in (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) पर उपलब्ध है। 31 जुलाई, 2009 तक भारतीय मूल के 4.56 लाख व्यक्तियों ने भारतीय प्रवासी नागरिकता के तहत पंजीकरण कराया।

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 21-04-2011