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भारत का संविधान सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा सुनिश्चित करता है और निःसंदेह सभी व्यक्तियों के साथ विकलांगजनों को भी समाज में समानता के साथ शामिल करता है। विकलांगता अधिनियम, 1995 (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) के प्रावधानों के अनुसार व्यक्तियों में विकलांगता की सात श्रेणियों की पहचान की गई है। जैसे; नेत्रहीनता, रतौंधी, कुष्ठरोग, श्रवण दुर्बलता, गतिहीनता, मानसिक मंदता और मानसिक बीमारी। इन सात श्रेणियों में आने वाले व्यक्तियों में यदि न्यूनतम 40 प्रतिशत तक की विकलांगता है, तो वे विकलांगजन सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले सभी लाभों के लिए पात्र हैं।

11वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार देश की आबादी का 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा इस तरह की समस्या से ग्रस्त हो सकता है। हमारी आबादी के इस बड़े भाग को समान सेवाओं और अवसरों की जरुरत है। सभी को साथ लेकर चलना समग्र विकास के लिए भी एक आवश्यक गुण है। इसलिए हमारे देश के विविध विकलांगजनों की बहुमूल्य मानव संसाधन के रूप में पहचान की जा रही है, सरकार द्वारा ऐसे विकलांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए विभिन्न पहल की गई हैं।

विकलांग व्यक्तियों के कल्याण की दिशा में उठाए जा रहे कदम सरकार की नीतियों, अधिनियमों, योजनाओं में और विकलांग व्यक्तियों के विकास व पुनर्वास के लिए स्थापित संस्थानों के माध्यम से प्रदर्शित किए गए हैं।

भारत के राष्ट्रीय पोर्टल के इस अनुभाग में आपको सरकार द्वारा विकलांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत और अद्यतन जानकारी दी गई है। विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों, नीतियों और सेवाओं का भी इस अनुभाग में उल्लेख किया गया है।

विविध विकलांगजन से संबंधित सूचना


स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 02-05-2011